चंडीगढ़ को मिला 100 बेड का नया अस्पताल

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चंडीगढ़ को मिला 100 बेड का नया अस्पताल

चंडीगढ़। यूटी के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने सोमवार को शहर के लोगों को 100 बेड का एक अस्पताल समर्पित कर दिया। बदनौर ने सांसद किरण खेर के साथ सेक्टर-48 में 24 करोड़ रुपये से तैयार हुए 100 बेड के अस्पताल का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रशासक के सलाहकार मनोज परीडा, मेयर राजेश कुमार और प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद थे। अस्पताल शुरू होने के बाद शहरवासियों को इसका फायदा मिलेगा। पीजीआई, जीएमसीएच-32, जीएमएसएच-16, मनीमाजरा अस्पताल व सेक्टर-22 अस्पताल पर मरीजों का जो दबाव है, वह काफी हद तक कम होगा। पंजाब और आसपास के अलावा दक्षिणी सेक्टर के मरीजों को इससे लाभ मिलेगा।
प्रशासन इस अस्पताल को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर चला सकता है। यहां पर 80 से ज्यादा डॉक्टरों की भर्ती को मंजूरी नहीं मिलने पर अस्पताल को पीपीपी मोड में चलाने की योजना तैयार की गई है। प्रशासन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को डॉक्टरों की भर्ती करने का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। इसे देखते हुए प्रशासन पीपीपी मोड पर देने पर विचार कर रहा है। पीपीपी मोड पर अगर बनती है तो प्रशासनिक अधिकारियों की कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी न केवल एग्रीमेंट की शर्तें तय करेगी, बल्कि इसका भी ध्यान रखेगी कि शहर के सरकारी अस्पतालों की तर्ज पर ही यहां सस्ता और बेहतर इलाज मिले। समझौते में ख्याल रखा जाएगा कि ओपीडी या सर्जरी आदि के जो रेट प्राइवेट अस्पतालों में हैं,उतने रेट यहां न हों। एग्रीमेंट ऐसा होगा कि यहां लोगों को कॉमन इलाज मिल सके।

प्रशासन सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाना चाहता है

प्रशासन शहर में स्वास्थ्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नए अस्पताल तो बना रहा है, लेकिन इन अस्पतालों के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति प्रशासन के लिए चुनौती बनते जा रही है। सेक्टर-48 में तैयार हुए अस्पताल को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाने की योजना थी। लेकिन, डॉक्टर न मिल पाने के काण बाद में इसे जनरल अस्पताल बनाने का ही फैसला लिया गया। प्रशासन ने इस अस्पताल को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था लेकिन अस्पताल को सुपर स्पेशिएलिटी बनाने के काम में अड़चन यह आई कि अलग अलग रोगों के स्पेशिएलिट्स डॉक्टर नहीं मिल पा रहे थे। इस वजह से प्रशासन के प्रस्ताव पर ब्रेक लग गया था। पहले प्रस्ताव यह था कि सेक्टर-48 में बनने वाले अस्पताल में कार्डियोलॉजी, कार्डियो थोरेसिक सर्जरी, न्यूरोलॉजी और न्यूरो सर्जरी की सुपर स्पेशिएलिटी शुरू की जानी थी।

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