चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना को मिला चिनूक सीएच-47 हेलीकॉप्टर

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चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना को मिला चिनूक सीएच-47 हेलीकॉप्टर

चंडीगढ़। सोमवार से भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा हो गया  क्योंकि  अमेरिकी कंपनी बोइंग के बनाए चिनूक सीएच-47 आई हेलीकॉप्टर अब भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया। चंडीगढ़ स्थित इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के 12वीं विंग एयरफोर्स स्‍टेशन में सोमवार को हुए एक कार्यक्रम में चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्‍टर की पहली यूनिट को शामिल कर लिया गया। कार्यक्रम में आईएएफ चीफ एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ भी शामिल हुए। आईएएफ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक चिनूक हेलीकॉप्‍टर कई बड़े देशों की वायु सेनाएं इस समय प्रयोग कर रही हैं। इस हेलीकॉप्‍टर का प्रयोग ट्रूप्‍स और जरूरी सैन्‍य सामान को ट्रांसपोर्ट करने के लिए किया जाता है।

एयर चीफ मार्शल बीएस ने कहा कि ‘ये मिलिट्री ऑपरेशन में भाग ले सकता है। ये न सिर्फ दिन में बल्कि रात में भी ऑपरेशन करने में सक्षम है। ये हेलीकॉप्टर देश के लिए गेम चेंजर साबित होगा। चिनूक सीएच-47 18 फीट ऊंचा और 16 फीट चौड़ा है। चिनूक के पायलटों की ट्रेनिंग अक्टूबर 2018 से ही शुरू हो गई थी। सीएच-47 18 फीट ऊंचा और 16 फीट चौड़ा है। चिनूक के पायलटों की ट्रेनिंग अक्टूबर 2018 से ही शुरू हो गई थी। भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब तक रूसी मूल के भारी वजन उठाने वाले हेलीकॉप्टर ही रहे हैं, लेकिन अब वायुसेना को अमेरिका में निर्मित हेलीकॉप्टर मिलेंगे, जो काफी एडवांस्ड हैं। इससे भारतीय वायुसेना की शक्ति में भारी इजाफा होगा।

बोइंग सीएच-47 चिनूक डबल इंजन वाला  हेलीकॉप्टर है, जिसकी शुरुआत 1957 में हुई थी।  तब से लेकर अब तक करीब 26 देश इस पर अपना विश्वास जता चुके हैं।  जिनमें वियतनाम युद्ध, ईरान, लीबिया और अफगानिस्तान जैसे देशों में यह हेलीकॉप्टर निर्णायक भूमिका निभा चुका है। चिनूक सीएच-47 आसानी से 11 हजार किलो तक के हथियार और सैनिकों को उठाने में सक्षम है। 315 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ान भरने वाले इस हेलीकॉप्टर में कंपनी काफी कुछ बदलाव कर चुकी है। इसमें कॉकपिट, रोटर ब्लैड और एडवांस्ड फ्लाइट कंट्रोल जैसे बदलाव शामिल हैं।

गौरतलब है कि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में यह हेलिकॉप्टर काफी कारगर हो सकता है क्योंकि इसे छोटे से हेलीपैड के साथ-साथ घाटियों में भी लैंड किया जा सकता है।  चिनूक को सबसे पहली बार नीदरलैंड ने 2007 में खरीदा था और इसका पहला विदेशी खरीददार बना था, जबकि अमेरिका 1962 से इसका इस्तेमाल कर रहा है। वहीं 2009 में कनाडा ने और दिसंबर 2009 में ब्रिटेन ने इसके अपग्रेडेड वर्जन खरीदे थे। ध्यान रहे कि अमेरिका ने इसी की मदद से आतंकी सरगना ओसामा बिन लादेन का खात्मा किया था। इसे पाकिस्तानी सीमा पर वायुसेना को और अधिक ताकतवर बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। 2015 में भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए डील की थी।

यह है चिनूक की खासियत

– इस हेलीकॉप्टर में एक बार में गोला-बारूद, हथियार के अलावा सैनिकों को भी भेजा जा सकता है।
– इस हेलीकॉप्टर को रडार से पकड़ पाना मुश्किल है। इसे दो पायलट उड़ा सकते हैं।
– ये हेलीकॉप्टर 10 टन तक वजन को 20000 फीट की ऊंचाई तक लेकर उड़ सकता है।
– भारी सामानों के बावजूद ये 280 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है।
– ये हेलीकॉप्टर छोटे से हेलिपैड और घाटी में भी लैंड कर सकता है.

– चिनूक हेलीकॉप्टर राहत और बचाव अभियानों में मददगार साबित होगा।
– भारत चिनूक को इस्तेमाल करने वाला 19वां देश होगा। बोइंग ने 2018 में वायुसेना के पायलटों और फ्लाइट इंजीनियरों को चिनूक हेलिकॉप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग भी दी थी।

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